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मंगलवार, अगस्त 02, 2016

दलित

प्रबुद्धजन सादर वन्दे ! 
मेरे विचार से हम इस भ्रांति को त्यागें, कि "दलित" शब्द जातिगत विशेषण है! 
मेरी दृष्टि में यह घटना प्रधान विशेषण है, जिसे राजनीतिक स्वार्थों ने जन्मजात बना दिया है! 
मैंने पीड़ितों को निकट से देखा और महसूस किया है! चाहे वे किसी भी जाति या धर्म के रहे हों, सुबह से शाम तक भूखे प्यासे गर्मी सर्दी बरसात में, तहसीलदार या थानेदार का इन्तजार करते! 
फ़िर यह फ़िक्र कि आज साहब न मिले, तो कल की मजदूरी भी नहीं आएगी ! उनकी सिफ़ारिश सिर्फ़ साहब के अलावा दूसरा कोई नहीं होता! फ़िर मेरे जैसा कोई नालायक तहसीलदार खुद अपनी सिफ़ारिश मानने की बजाय, उस पीड़ित को फ़िर कभी आने का कहकर, टाल देता है! और कल, कल ही रहता है, आज नहीं बनता! 
क्या वस्तुत: हम न्याय की कुर्सी पर बैठने के हकदार हैं? जरा हम सोच लें !! 

शनिवार, अप्रैल 09, 2016

भूख

आज   सुबह  जोधपुर  नई  सड़क   से  HIGH COURT पैदल  जाते  हुए ; उम्मेद  उद्यान  के  पास  HOTELS' रसोई  का  WASTAGE पड़ा   था . उस  के  पास  बैठा  एक  आदमी  उस  में  से  उठा उठा  कर  रोटी  सब्जी  के  टुकड़े  खा  रहा  था . मेरा  जी  मितलाने  लगा , उल्टी  आने  को  हुई . लगभग  100 मीटर  जाते  जाते  मेरी  आँखों  में  आंसु  आ  गए . मैं  जी  कड़ा  कर  के  वापस  लौटा ,  उसे  10 का  नोट  दिया ; उसने  निर्विकार  भाव  से , ले  लिया . मैं  HIGH COURT चला   गया ; जी  बहुत  ख़राब  था ; और  बार  बार  प्रभु  से  प्रार्थना  करता  रहा - इस  वक़्त  मेरे  खाते  में  कोई  पुण्य  हो  तो  उसे  दे  दो ¤
सोच  रहा  हूँ ;  शायद  भूख  भी , ज़िन्दगी  का  ही   हिस्सा  है .
ज़िन्दगी  कैसी  है  पहेली ? 
 कभी  ये  हंसाये  ! 
कभी  ये  रुलाये  !!  
   LET WE THINK;
 IS IT A HAPPY DIPAWALI ?
जय हिंद
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बुधवार, मार्च 12, 2014

प्यासे-पँछी


Photo: यदि हो सके तो घर के बाहर या आसपास थोडा पानी प्यासे परिंदों और राहगीरों के लिए रखिये ! पुराने घड़े भरने में आप का सिर्फ दस मिनट जायेगा लेकिन किसी सूखे कंठ को "जीवन" मिल सकेगा ! ये कोई एहसान नहीं आप की ज़िम्मेदारी है ,आप नहीं करेंगे तो वो करेगा जिस पर सब की ज़िम्मेदारी है ! हाँ आप जब-जब खुद को इंसान कहेंगे तो आप का ज़मीर आप पर हँस जरुर दिया करेगा ! 
"ये भूख-प्यास-तलब जिसकी है मेहरबानी,
उसी का काम है सब को मिले दाना-पानी ....."
गर्मी के मौसम में   पक्षी प्यास से मर जाते  हैं; पक्षी  के हमारे जीवन के अभिन्न अङ्ग, और प्राणी-जगत के महत्वपूर्ण सदस्य हैं; पर्यावरण संतुलन में इनकी महती भूमिका है; इन्हें घोंसला, चुग्गा,भूख, प्यास,  छाया, तथा आक्रमण आदि विकट समस्याओं से झूझना पड़ता है; 

मानव-जनित शोर, GLOBAL WARMING; प्रदूषण, भी हमारे समाजही  के नकारात्मक पक्ष हैं; हमने अपने जल-स्रोत्र, वन-सम्पदा, पर्वतीय आश्रय नष्ट करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है; पक्षियों के लिए प्राकृतिक आश्रय-स्थल नहीं बचे हैं; हैम इनके शिकारी और हत्यारे हैं ; 

आओ हम सब मिलकर प्रकृति के इन साथियों को बचाने का संकल्प 



करें _ 1. पक्षियों के लिए चुग्गा डालें !


2. छिड़कियों, दालान, TERRACE, 
BALCONY, छत आदि स्थानों पर पानी रखें !! 


3. पौधरोपण एवं उनका पालन करें !!!



4. कोलाहल  नियंत्रित करें !!!!

5.इन प्राणियों के मित्र बनें !!!!!

हम सुहृदय बनें और आज होली के पावन पर्व पर, स्वर्गीय सुनील दत्त साहब और नूतन द्वारा फ़िल्म "ख़ानदान " में दिए सन्देश को आत्मसात करें  :
नील गगन में उड़ते पँछी जा जा जा   !

देख अभी है , कच्चा दाना, पाक जाये तो खा !!


सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे  सन्तु निरामया; 
मा कश्चित् दुःख भागभवेत्  !! 

Jai Hind !!! 
यदि हो सके तो घर के बाहर या आसपास थोडा पानी प्यासे परिंदों और राहगीरों के लिए रखिये ! पुराने घड़े भरने में आप का सिर्फ दस मिनट जायेगा लेकिन किसी सूखे कंठ को "जीवन" मिल सकेगा ! ये कोई एहसान नहीं आप की ज़िम्मेदारी है ,आप नहीं करेंगे तो वो करेगा जिस पर सब की ज़िम्मेदारी है ! हाँ आप जब-जब खुद को इंसान कहेंगे तो आप का ज़मीर आप पर हँस जरुर दिया करेगा ! 
"ये भूख-प्यास-तलब जिसकी है मेहरबानी,
उसी का काम है सब को मिले दाना-पानी ....."
Askhok, Satureday 29.05.2010 19.26 IST

                                                         
                                                                                                            
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https://www.youtube.com/watch?feature=player_detailpage&v=O61ARzjYKnY#t=21http://apnykhunja.blogspot.in/2010/05/save-birds.html

शुक्रवार, जुलाई 20, 2012

Generic-medcin

मित्रो, आज नारंग होटल हनुमानगढ़ में, चिकित्सा विभाग ने CONFERENCE ON MAKING TREATMENT AFFORDABLE ; RATIONAL USE OF DRUGS का आयोजन किया  डॉक्टर समित शर्मा MANAGING DIRECTOR, NATIONAL RURAL HEALTH  MANAGEMENT ने जिला स्तरीय सम्मलेन में मुख्या-मंत्री निःशुल्क दवा योजना के अंतर्गत जिले के चिकित्सकों के समक्ष POWER PRESENTATION के साथ प्रभावशाली व् भावपूर्ण  उदबोधन दिया; इसका मुख्य लक्ष्य था -
1- अनावश्यक दवाईयों से बचा जावे;
2- समान गुण-धर्म वाली महँगी दवाई की बजाय उसी प्रकृति की सस्ती दवाई इस्तेमाल की जावे;
3-दवाई को कंपनी की बजे उसके SALT -NAME से लिखा जावे
4-GENERIC-MEDICIN का चलन किया जावे;
5-डाक्टर स्वयं को भगवान के रूप में स्थापित करें
परिचर्चा में जिला-प्रमुख श्रीमती शोभा सिंह डूडी, कार्यवाहक जिला-कलक्टर BL मेहरड़ा, CMHO डाक्टर SP सिंह, NRHM के जिला प्रभारी डा प्रीत मोहिंदरसिंह, PMO डॉ HP रोहिल्ला, और लगभग 100 चिकित्सकों ने भाग लिया  !
मित्रो लगभग अढाई वर्ष पूर्व जब मैं और राजस्थान पत्रिका के अमरपाल सिंह वर्मा समित साहब के सानिध्य में नागौर थे तो मैंने एक BLOG लिखा था जो आज फिर पेश कर रहा हूँ ! _

http://apnykhunja.blogspot.in/2011/03/bravo-dr-samit-sharma.html

Respected elders &; my friends,
It is my second blog &; I want to introduce you;
Dr Samit Sharma, an IAS officer, and now posted as the District Collector &; District Magistrate at Nagaur, Rajasthan.
He was a doctor &; later selcted in Indian Administrative Services. He continued his work; at Low cost Generic medcines, while he was posted at Jodhpur, Alwar, Jhalawar, Chittaurhgarh &; Nagaur. Generic medicines are approximate20% of cost; in comparasion to the branded companies; because these are based on salt composition. Dr Sharma says that almost 40000 people die per day, due to non availability of medicine; because they have no funds for the costly branded medicine. Government of Rajasthan, also have ordered to all the medical officers, to prescribe only the generic medicines.
It is a matter of proud, not only for the Nagaur district, but also for the whole State of Rajasthan; that Dr Samit Sharma has been awarded by Hon'ble Prime Minister Dr Manmohan Singh for his work at the civil day of 21st of April, 2010, in New Delhi.
 May Almighty God Bless us; &; show the path of humanity &; mankind, as we may help the poors &; needy. Let us motivate the people, for the generic medicines.
¤Bravo Dr Samit Sharma¤

Thanks
ASH0K Tehsildar, Election Nagaur
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शनिवार, मार्च 17, 2012

ज़नून

सचिन के शतकीय शतक से बेहोश होकर हम पर ज़नून छा गया! TEAM की हार में दिमाग नहीं है; मेहनत, लगन और एकाग्रता से 100 शतक बने हैं; यह सही है ! घर परिवार, गाँव, राज्य या देश का कोई नागरिक उंचाई पर पहुंचता है, तो ख़ुशी होनी ही चाहिए; वो लता मंगेश्कार हो, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी या फिर धीरुभाई अम्बानी ! पर ज़नून के जोश में इनकी तुलना सरदार भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गाँधी, खान अब्दुल गफ्फार खान गाँधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, किरण बेदी, हेमंत करकरे, TN SHESHAN..., नेल्सन मंडेला, आँग सु, सुन्दरलाल बहुगुणा, या अन्ना हजारे से नहीं की जा सकती; जोश में होश की ज़रूरत होती है,
मुंबई के एक Fly-Over को रुकवाने के लिए, लता मंगेशकर ने हंगामा किया था ! अमिताभ बच्चन सर दर्द की जो गोली बेचते हैं, क्या उन्होंने वो 2 रुपये में कभी खरीदी ? सचिन जो बिस्कुट बेचते हैं, उन्होंने कभी पैसे देकर खरीदा या खाया ? माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा लोक सभा या राज्य सभा के लिए नामांकित किये जाने पर ये विशिष्ट योग्यता वाले संसद में जाने की बजाय; तेल,साबुन, कच्छा, बनियान, powder cream  TOOTH PASTE और आलू-चिप्स बेचने को उत्साहित रहते हैं; एक दिन के लाखों करोड़ों मिल जाते हैं; फिर कम्पनियाँ गरीब जनता से दस गुना वसूल करे, तो इनके बाप का क्या जाता है ? लोक दिखावे को, ये CHARITY -SHOW करते हैं, पर प्रायोजकों से आने-जाने, रहने ठहराने खाने पीने के लाखों रूपये खर्चे तो लिए ही जाते हैं; शिर्डी के साईं हो या बापू आसाराम, धन तो देश और जनता का लूटा जा रहा है! डाकू की लूट और इस लूट में ज्यादा फर्क नहीं है! और सबसे बड़ा फायदा ये, कि इस तरह की हरक़तें भ्रष्टाचार की परिभाषा से बाहर है,

तैर्दत्तानप्रदाधैभ्यो ये भुङ्क्ते स्तेन एव सः !3-12!
देने वाले दाता द्वारा दिए हुए भोगों को जो पुरुष उनको भोग लगाए बिना भोगता है; वह चोर ही है !

देश के सर्वोच्च नागरिक पदक और सम्मान देशभक्तों और मानवता के सेवकों के लिए होते हैं; व्यक्तिगत सामर्थ्यवान लोगों के लिए नहीं !

जय हिंद جیہینڈ ਜੈਹਿੰਦ
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http://www.apnyvaani.blogspot.com/; http://www.apnykatha,blogspot.com/
ASHOK; Apny-Khunja; Hanumangrh Junction ; My Location at Globe

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शुक्रवार, जुलाई 15, 2011

GAMGEEN गमगीन


कल मुकेश जी की याद में
 सावन का सुहाना सफर गाता हुआ
 भानियावाला से डोईवाला
पैदल ही आ रहा था
सोंग नदी तक पहुँचते पहुँचते
 घनघोर घटाओं ने
मुझे लङकपन लौटा दिया
 एक शिलाखण्ड पर बैठ कर  
 एक जलधारा से अठखेलियां करने लगा
 बीच धार डूबते तैरते
एक युवक ने मुझे मदद के लिए पुकारा
 मैने कहा-
 पांच सौ रूपये लूंगा
 उसने बहते-बहते दोनो बांहे मेरी ओर फैलाईं
मै और भी दृढ हो गया
 पांच सौ तो लूंगा ही 
 मेरी ओर ताकते ताकते 
 उसकी कातर दृष्टि
  लहरों मे लीन हो गई
 तब से
   मै गमगीन हूं
 पूरे पांच सौ डूब गये
 अब
उम्मेद अस्पताल मे
बे ईलाज मरते मरीजों की खबरों ने
 मेरे दिल को दिलासा दिया है
  बेचारे
 डाक्टरों के लाखों डूब गये
 मेरे तो पांच सौ ही थे
 आओ
 हम सब मिलकर उनकी और इनकी 
 सदगति के लिए
 प्राथॅना करें
JAIHIND जयहिन्द
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