शुक्रवार, मार्च 25, 2016

असहिष्णुता

"असहिष्णुता" नामक जीव बेचारा अब कुछ पनपने लगा है! Intolerance का तो पता  नहीं, पर असहिष्णुता से मेरा  वास्ता तो १९६८ से  चला आ रहा है!  चार उदहारण पेश हैं:-
१- १९६८ से ७० तक  रायसिंहनगर रामलीला में सरदारगढ़ का कोई बाकर अली और उसका सरदार दोस्त एक दूसरे के नाम पर रुपये लुटाते थे!
२- १९७० से ७४ तक डोईवाला (देहरादून) में हमारे अँग्रेज़ी के अध्यापक हसीन अहमद साहब का जबरदस्त होली खेलना! 
३- १९८६ से ९५ तक श्रीगंगानगर में सिराजुद्दीन भाई और फरीद खान साहब PRO के साथ होली का हुड़दंग; और बकरीद हो या मीठी ईद!  सिराज साहब के घर ही खाना खाना!
४- २०१२ से १४ श्रीविजयनगर तहसील में मुज़फ्फर अली  सिक्ख गुरुओं व हिँदु धर्म की बारीकियों पर अक्सर चर्चा करता रहता था!
और इन सब पर भारी वह लड़कीलड़की मरियम सिद्दिकी, जिसने श्रीमद्भागवद्गीता का गहन पाठ करके ईनाम जीत लिया है!
ऐसे ही लोग तो बेचारी असहिष्णुता को पनपते नहीं देते!
खुदा सबको सद्बुद्धि दे!  
Ashok Kumar khatri, LAO PWD Bikaner 334001


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